टाइम्स नाउ मध्य प्रदेश संवादाता विशेष मनोहर अग्रवाल बैतूल :
मुल्ताई में कानून व्यवस्था पर सवाल धमकियों के साये में पत्रकार मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मुल्ताई क्षेत्र से सामने आया मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ओर सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षा के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पत्रकार पियूष शर्मा को पिछले 15 दिनों से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

आरोप है कि अज्ञात तत्व उनकी तलाश में क्षेत्र में घूम रहे हैं और हाल ही में उनके घर में घुसकर परिवार के सदस्यों को भी खुलेआम धमकाया गया। यह स्थिति न केवल एक पत्रकार की सुरक्षा पर खतरा दर्शाती है, बल्कि पूरे समाज में भय का माहौल पैदा करती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि CCTV फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां सामने आने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई का अभाव नजर आता है। इससे प्रशासन की निष्क्रियता और कानून व्यवस्था की कमजोर पकड़ उजागर होती है। प्रश्न उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या कानून का भय समाप्त हो चुका है, या फिर कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है? यदि एक पत्रकार, जो समाज के मुद्दों को सामने लाता है, स्वयं असुरक्षित है, तो आम नागरिक की सुरक्षा का भरोसा कैसे किया जाए?

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रेस मीडिया पत्रकार कल्याण संघ, बैतूल के सचिव मनोहर अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर शीघ्र और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो पत्रकार संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगा। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा और सुरक्षा से जुड़ा है। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करे और यह स्पष्ट संदेश दे कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।
