भाइयों हो जाइए सावधान अपना बैतूल हे साइबर ठगो के रेडार पर। आए दिन हो रही घटना डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23.50 लाख की ठगी, बैतूल में साइबर अपराध का खतरनाक सिलसिला उजागर
नवंबर से जनवरी तक एक के बाद एक वारदातें, हर वर्ग बना निशाना; पुलिस जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत
खबर विश्लेषण : टाइम्स नाउ मध्य प्रदेश डिजिटल डेस्क | बैतूल
बैतूल जिले में साइबर ठगी का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ता जा रहा है। नवंबर और दिसंबर में सामने आए कई मामलों के बाद 7 जनवरी को हुई 23.50 लाख रुपये की बड़ी ठगी ने एक बार फिर लोगों की नींद उड़ा दी है। “डिजिटल अरेस्ट” जैसे नए हथकंडे अपनाकर ठग न सिर्फ आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि पीड़ितों को मानसिक रूप से भी तोड़ रहे हैं।

7 जनवरी की घटना में ठगों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताते हुए वीडियो कॉल पर संपर्क किया। मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाया गया। तीन दिन तक मानसिक दबाव बनाए रखने के बाद सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से अलग-अलग खातों में 23.50 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर सेल ने खातों को फ्रीज़ कराने और ट्रांजेक्शन ट्रेल खंगालने की कार्रवाई शुरू की है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी जिले में अलग-अलग इलाकों से साइबर ठगी की गंभीर शिकायतें सामने आ चुकी हैं। 20 नवंबर को बैतूल ग्रामीण क्षेत्र के एक किसान से ऑनलाइन निवेश का झांसा देकर करीब 6.80 लाख रुपये की ठगी की गई। मोबाइल पर भेजे गए लिंक के माध्यम से पहले मुनाफा दिखाया गया और फिर बड़ी राशि ट्रांसफर करा ली गई।इसके बाद 28 नवंबर को शहर के गंज क्षेत्र में एक निजी स्कूल संचालक से फर्जी बैंक अधिकारी बनकर संपर्क किया गया। केवाईसी अपडेट के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से 3.25 लाख रुपये निकाल लिए गए। पीड़ित ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
5 दिसंबर को टिकारी वार्ड निवासी एक गृहिणी साइबर ठगों का शिकार बनी। ई-कॉमर्स रिफंड के नाम पर कॉल कर स्क्रीन-शेयरिंग ऐप डाउनलोड कराया गया और मोबाइल का एक्सेस मिलते ही खाते से 1.90 लाख रुपये उड़ा लिए गए। शिकायत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज हुई।
वहीं 12 दिसंबर को चिचोली रोड क्षेत्र के एक व्यापारी को व्हाट्सऐप लिंक भेजकर फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराया गया। लगातार रकम जमा कराने के बाद प्लेटफॉर्म बंद हो गया और व्यापारी को 7.60 लाख रुपये का नुकसान हुआ।पुलिस के अनुसार इन सभी मामलों में म्यूल अकाउंट, फर्जी सिम और अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क के संकेत मिले हैं। बैंकों के साथ समन्वय कर रकम रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि पूरी राशि वापस मिलना चुनौती बना हुआ है।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या पैसे की मांग नहीं करती। ओटीपी, पिन और स्क्रीन-शेयरिंग से दूरी बनाए रखें और किसी भी संदिग्ध कॉल या लिंक की सूचना तुरंत 1930 या नजदीकी थाने में दें।लगातार सामने आ रही घटनाएं यह साफ संकेत दे रही हैं कि बैतूल में साइबर ठगी अब छिटपुट वारदात नहीं, बल्कि एक संगठित और योजनाबद्ध अपराध का रूप ले चुकी है। समय रहते जागरूकता और सतर्कता ही इससे बचाव का सबसे मजबूत उपाय है।

